Skip to main content

मुज़फ्फरनगर नहीं मुजफ्फरपुर।

'दोस्त दोस्त न रहा, प्यार प्यार न रहा'  ये पंक्तियाँ मुजफ्फरपुर के दो दोस्तों के संबंधों पर सटीक बैठती है जब भारतेंदु और विक्की ( सदाकत अली ) की जिगरी दोस्ती में परी खटास ने अंत में एक सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया था। इस साल के प्रारम्भ में ही मुजफ्फरपुर के अज़ीज़पुर कसबे में दो परिवारों की आपसी मन-मुटाव ने कई जाने ले ली और अज़ीज़पुर छेत्र  को हिंसा का गवाह बनते हुए अपमान का घूट पीना परा। दो सप्ताह ,मुजफ्फरपुर जिला में और उसके आस पास के इलाके में निरंतर उपद्रव का माहोल बना रह।
      ' हंगामा है क्यों बरपा '- हुआ कुछ यूँ की भारतेंदु और विक्की तो मित्र थे ही उनकी बहनों के बीच भी अच्छी मित्रता थी , पारिवारिक सम्बन्ध भी दोनों घरों के बीच बरसों से था जो की अमूमन हर छोटे कसबे में एक परिवार का दूसरे परिवार से होता है हर धार्मिक संवेदना को दूर रख कर। भारतेंदु और विक्की की बहन के बीच जब प्रेम - प्रसंग की बात सामने आई तब सारे पुराने सम्बन्ध दो क्षणो में ध्वस्त हो गए। भारतेंदु ने अपने प्रेम के लिए जान गँवाई , वंही दूसरी और भारतेंदु की हत्या के बाद उसकी प्रेमिका के पुरे मोहल्ले को उपद्रव का शिकार हो न परा। फिर क्या था, धर्म के नाम पर बवाल काटने वालों ने इस झरप को सम्प्रदाियक हिंसा बना दी और अपना स्वार्थ साधने के लिए  लूट-पाट , आगजनी करने लगे। हमेशा जो 'उपद्रव-वादी' नहीं बनते वही मारे जाते हैं चाहे वो सूरज हों या आफ़ताब हों , मुज़फ्फरनगर के हों या मुजफ्फरपुर के हों , तो फिर यंहा भी वही हुआ भारतेंदु के हत्या का आरोपित परिवार उपद्रव से पहले ही फरार हो गया था जबकि हिंसा और आगजनी का शिकार तो स्थानीय लोगों को होना पड़ा।
     प्रसासन की नाकामी ने इस पुरे झरप को आकार दिया और नेताओं ने इस आकर में राजनितिक रंग भड़े। कुछ नेताओं की डगमगाती राजनीती को इस हिंसा से काफी फायदा पंहुचा है , एक - दूसरे पर आरोप मढ़  कर इन नेताओं को समाचारपत्रों में जगह जो मिली है।
   हिंसा-ग्रसित छेत्र से  एक लड़का शहर में अपने एक सम्बन्धी के घर भाग कर आया था , उसके घर को जला दिए गया था , उसके बापू को पुलिस अस्पताल ले गयी , उसके चाचा के घर के दरवाज़े को तोड़ कर लोगों ने लूटपाट की थी , वो डरा सहमा था पर होश में था और सारे सवालों का जवाब दे रहा था  बस मुझे एक सवाल का जवाब थोड़ा अटपटा लगा था या यूँ कंहे की उसके मनोभाव को समझने के लिए बस वही उत्तर काफी था   "तुम्हारा नाम क्या है ? - "क्यों ?"

Comments