अपने शहर की एक बात बताता हूँ, माफ़ की जीयेगा मोहल्ले के बच्चों की एक बात बताता हूँ , जब कभी गर्र गर्र की आवाज़ आती , मतलब कोई हवाईजहाज़ आसमन में गुर्राते हुए हमारे आँगन के ऊपर से बेफिक्र उड़ता ,तब सारे काम छोड़ कर हम हवाईजहाज़ के पीछे पीछे भागने लगते , चिल्लाते , आसमान की तरफ हाथ हिला हिला कर 'टाटा' करते , देर तक आसमान की ओर ही ताकते रहते , फिर सब को बताते फिरते और जो कोई नहीं देख पाया हो उसे चिढाते....!!! हमें वक़्त बे-वक़्त ये ख़ुशी मिलती रहती , हाँ, कभी कभी ये ज़्यादा भी हो जाती थी जब चुनाव आते थे मगर फिर भी ऐसा कभी नही होता था की कोई उड़ानखटोला हमारे मोहाले के आसमान से गुज़रे और हमारी गर्दन ऊपर नहीं हुई हो....चाहे घर के जिस कोने में हो। उस उड़नखटोले में बैठ कर मोहल्ले का हर बच्चा शहर से दुर्र कंही उड़ जाना चाहता था और मुझे भी ये उम्मीद दिल में आगयी थी की एक दिन ये मेरे छत पर ज़रूर उतरेगा या रस्सी फेकेगा और मैं फिर लोगों को टाटा -बाय बाय करता हुआ उड़ जाऊंगा , मुझे ऐसी जगह ले जायेगा जँहा इस हवाईजहाज़ के माँ - बाप होंगे , उसका घर होगा , भाई बहन होंगे , कितना मज़ा आएगा। …मैं सबसे ...