जब 1965 में जनता को राम लीला मैदान में सम्बोधित करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने "जय जवान जय किसान" का नारा दिया था, तब हमारे समकालीन प्रधानमंत्री सम्भवता युवा अवस्था के समीप होंगे और इस नारे के प्रभाव को समय के साथ साथ उन्होंने ने भी अनुभव तो किया ही होगा। इस नारे को शास्त्री जी द्वारा उस समय देने के पीछे सीमा सुरक्षा और आर्थिक समस्या जैसे कारन होंगे परन्तु ये नारा पुरे भारत भर में एक नयी ऊर्जा का संचार करने में सफल रही थी। चाहे कारगिल का युद्ध हो या अनाज की कमी की समस्या , हमरे जवानो और किसानो ने अपने रक्त को नीर के भांति बहाते हुए दोनों समस्याओं को हल किया परन्तु आज पचास साल बाद वही जवान "वन रैंक वन पेंशन" की मांग को लेकर 12 जून से आंदोलन कर रहा है और सरकार तारीख पर तारीख देती जा रही है, वंही दूसरी ओर किसान आत्महत्या कर रहा है और सरकार महज इसे एक सयोंग मानती है। तीनो सेनाओं के पूर्व दस जनरलों ने प्रधानमंत्री को खुला पात्र लिखा है की आखिर वन रैंक वन पेंशन को लागु करन...