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Showing posts from December, 2015

बुनी हुई क्लास

छात्र जीवन में या यूँ कहें की स्कूली जीवन में सबसे अधिक आनंद तब आता था जब स्कूल बंद हो , मास्टर साहब न आएं हो , स्कूल बस छूट गयी हो , या  फिर किसी आकस्मिक घटना की वजह से छुट्टी हो गयी हो यानी की वजह कोई भी हो बस पढाई से मुक्ति मिलना सबसे अधिक सुकुन देता था। मगर इस ठण्ड के मौसम में छुट्टी मिलने के अलग अलग कारण होते थे जो सबसे अनोखे और मज़ेदार होते। हमें पता भी नहीं  चलता  था की आज कौन सी क्लास नहीं होगी और कौन सी होगी , कभी किसी मास्टर साहेब को इतनी ठण्ड लगती की वो अलाव जला कर बैठ जाते और दूसरे टीचरों के साथ गप्पे हांकते तो कभी किसी मैडम की ठिठुरन स्टाफ रूम में कॉफी पीते पीते जाती। इस मौसम से दिनचार्य में बदलाव आना तो स्वाभाविक था परन्तु एक अलग सी  दैनिक-संस्कृति भी थी जो अब तेज़ी से रेडीमेड हो गयी है  , ठण्ड के आने से पहले और ठण्ड के जाते-जाते तक , हरी , नीली पिली कई रंगों वाले मुलायम ऊनों के 'बुनते हुए स्वेटर' भी हमारी क्लास में पढाई न होने का सबसे अनोखी वजह बनती थीं। मैडम ने क्लास मे...