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Showing posts from May, 2016

गुरु गोविन्द सा मिला

जैसे ही नोटिस बोर्ड पर सब्सिडियरी सब्जेक्ट की लिस्ट देखी मेरे तो पैरों के निचे से ज़मीं निकल गयी , यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने के बाद यंहा के नए माहौल से ताल मेल बैठाने और पढाई में बेहतर करने का मेरा उद्देश्य भष्म होता दिखाई दिया क्योंकि 'हिंदी साहित्य का इतिहास ' मेरे सब्सि पेपर का विषय बन गया था और इस से पहले मैंने हिंदी को विषय के तौर पर पांच साल पहले आठवीं में पढ़ा था , तब भी मैं हिंदी भाषा में अतयन्त कमज़ोर छात्र था , न ही व्याकरण का ज्ञान था न ही वर्तनी का , चालीस , पैंतालीस से ज़्यादा अंक कभी ला नहीं पाया , बस इन्ही पृष्ठभूमि के साथ मैं नोटिस बोर्ड के सामने ही नि:शब्द खड़ा रहा।  सब्सि की पहली कक्षा में ही ये आभास हो गया था की मैं इस विषय में तो ज़रूर ही फ़ैल होने वाला हूँ क्योंकि पहली क्लास में गुरु देव के वाणी का कुछ भी रस मेरे भुद्धि में नहीं पंहुचा।  एक  , दो क्लास मैंने यूँही ही गुरुदेव से खुद को छिपाते हुए पूरा किया , कहते हैं न डूबते को तिनके का सहारा पर मुझे तो पूरी की पूरी नौका ही मिल गयी और ये" नौका" मुझे मिली...