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Showing posts from February, 2016

तरक्की

मज़ार के बगल से नहर बहती थी नहर के उस पार शहर था जिस गावों में मज़ार था वहाँ के लोग रोज़गार के खातिर कभ कभी नहर पार किया करते थे, शहर से भी मज़ार की ज़ियारत के लिए कुछ लोग कभी कभी आ जाया करते थे , फिर धीरे धीरे उस नहर पर पुल बना दी गयी शहर अचनक बढ़ने लगे.! उधर मज़ारों की संख्या भी बढ़ने लगी , बस नहर नहीं बढ़ी।